422 में 400 बूथ हारे BJP, रविशंकर-रामकृपाल का बूथ भी गया, PK ने 9 गुना वोट बढ़ाए...

बांकीपुर उपचुनाव में BJP को बड़ा झटका। 422 बूथों में 400 पर हार। रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव का बूथ भी जन सुराज के नाम। 10 महीने में PK ने वोट 8 हजार से बढ़ाकर 64,151 किए। सवर्ण नाराजगी और कम वोटिंग बनी BJP हार की बड़ी वजह।

Aug 05, 2026 - 12:38
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422 में 400 बूथ हारे BJP, रविशंकर-रामकृपाल का बूथ भी गया, PK ने 9 गुना वोट बढ़ाए...

पटना: बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को 2 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बीजेपी के अंदर आत्ममंथन जारी है। वहीं जन सुराज ये समझने में लगी है कि ये जीत आगे कैसे बरकरार रखी जाए। 

रिजल्ट ने सबको चौंकाया क्योंकि BJP अपने स्टार नेताओं का बूथ तक नहीं बचा पाई।

10 महीने में पलटा पूरा समीकरण  
2025 विधानसभा में जन सुराज की वंदना कुमार को सिर्फ 8 हजार वोट मिले थे। इस बार प्रशांत किशोर ने उसी सीट पर 64,151 वोट लेकर BJP के नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हरा दिया। यानी 9 गुना बढ़ोतरी। RJ D को भी नुकसान हुआ। तेजस्वी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को वैश्य वोट तक ट्रांसफर नहीं हो पाए।

स्टार नेताओं के बूथ पर भी हार  
बांकीपुर के 422 बूथों में से 400 पर BJP हारी। 
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का बूथ
मंत्री रामकृपाल यादव का बूथ  
पूर्व विधायक नितिन नवीन का बचपन वाला इलाका पीरमुहानी

सभी जगह PK आगे रहे। BJP सिर्फ AN कॉलेज, किदवईपुरी और PNT कॉलोनी जैसे 3 इलाकों में 17 वोट से बढ़त ले पाई।

हार के पीछे 3 बड़ी वजह  
1. कम वोटिंग: कुल 3.79 लाख वोटरों में सिर्फ 1.30 लाख ने वोट किया। 2025 की तुलना में 26 हजार वोट कम पड़े। माना जा रहा है ये ज्यादातर BJP समर्थक थे जो घर से नहीं निकले।  
2. सवर्ण नाराजगी: UGC एक्ट और अन्य मुद्दों पर सवर्ण वोटरों का गुस्सा। कई वोटरों ने कहा "30 साल से BJP को वोट दिया, इस बार नहीं देंगे।"  
3. अतिआत्मविश्वास: रामकृपाल यादव का "बाहरी" वाला बयान और बंटी की जगह नीरज सिन्हा को उतारना पार्टी को महंगा पड़ा। मीठापुर के अलावा कई इलाकों में नीरज को लोग जानते तक नहीं थे।

PK का अगला प्लान  
जन सुराज अब ये एनालिसिस कर रही है कि वोट कहां-कहां से मिले ताकि पंचायत चुनाव में वही फॉर्मूला दोहराया जाए। बोरिंग रोड, मीठापुर, जक्कनपुर जैसे BJP गढ़ वाले बूथों पर भी PK ने बढ़त ली। बांकीपुर ने साबित कर दिया कि BJP का 30 साल पुराना गढ़ अब अभेद्य नहीं रहा। अतिआत्मविश्वास और कोर वोटर की नाराजगी ने बीजेपी को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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