भाजपा MLC के इस्तीफे से दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचेगा, NDA की बड़ी सियासी चाल?

भाजपा MLC देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा। माना जा रहा है खाली सीट से पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद जाएंगे। संविधान की 6 महीने की समय-सीमा का संकट टलेगा। जानिए कौन हैं देवेश कुमार और इस इस्तीफे के पीछे की एनडीए की रणनीति।

Aug 01, 2026 - 13:44
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भाजपा MLC के इस्तीफे से दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचेगा, NDA की बड़ी सियासी चाल?

पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। उनके अचानक पद छोड़ने को राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एनडीए की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।

क्यों दिया इस्तीफा?  
सूत्रों के मुताबिक देवेश कुमार की सीट खाली कराकर सरकार पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी कर रही है। दीपक प्रकाश फिलहाल मंत्री हैं लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर सदन की सदस्यता लेना जरूरी है। देवेश के इस्तीफे से उनके सामने बना संवैधानिक दबाव अब खत्म होता दिख रहा है।

कौन हैं देवेश कुमार  
62 साल के देवेश कुमार समस्तीपुर के पूसा के रहने वाले हैं। उनके दादा यमुना कार्जी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व विधायक थे। देवेश ने ABVP से छात्र राजनीति शुरू की, फिर पत्रकारिता की और बाद में भाजपा संगठन में सक्रिय हुए। संगठन में अच्छे काम के कारण उन्हें मिजोरम का प्रभारी भी बनाया गया।  
2021 में राज्यपाल कोटे से उन्हें विधान परिषद भेजा गया था। उनका कार्यकाल 2027 तक था।

एनडीए की गणना  
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सहयोगी दल RLM और उसके प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को साधने के लिए लिया गया है। दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। भाजपा ने इस कदम से गठबंधन में संतुलन बनाए रखने और सहयोगी को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।

विवादों में भी रहे देवेश  
देवेश कुमार पहले भी दो बार चर्चा में आए। जुलाई 2022 में पटना में सड़क हादसे के बाद उन पर शराब पीने का आरोप लगा था। फरवरी 2026 में बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी से सदन में उनकी तीखी बहस भी हुई थी।

आगे क्या  
अब सबकी नजर चुनाव आयोग और विधान परिषद की प्रक्रिया पर है। अगर दीपक प्रकाश MLC बनते हैं तो उनका मंत्री पद सुरक्षित हो जाएगा। वहीं देवेश कुमार को संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। फिलहाल देवेश का इस्तीफा बिहार की गठबंधन राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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