पैसे-नौकरी नहीं, पहले न्याय चाहिए- भरत तिवारी की मां ने शहीद का दर्जा देने की मांग की, 15 अगस्त को फहराया तिरंगा
भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद CM सम्राट चौधरी ने परिवार को आर्थिक मदद और नौकरी दी। लेकिन मां आशा देवी ने कहा- पहले न्याय चाहिए। परिवार ने बेटे को शहीद का दर्जा देने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद नया मोड़ आ गया है। CM सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया।
लेकिन परिवार ने इसे मंजूर करने से पहले न्याय की मांग रख दी है।
15 अगस्त को तिरंगा, साथ में न्याय की गुहार
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भरत तिवारी के घर के बाहर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। गांव के लोग भी मौजूद रहे और तिरंगे को सलामी दी। इसी दौरान 'भरत तिवारी को न्याय दो' के नारे भी गूंजे।
मां और भाई बोले- पहले न्याय, फिर मुआवजा
मां आशा देवी ने साफ कहा, हमें पैसे और नौकरी से ज्यादा बेटे के लिए न्याय चाहिए। सरकार भरत को शहीद का दर्जा दे। मेरे बेटे ने लोगों के लिए जान दी है।
उन्होंने आरोपित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की भी मांग की।
भाई चंदन तिवारी ने सरकार की मदद की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन कहा कि परिवार की पहली प्राथमिकता न्याय है। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हमें असली न्याय नहीं मिलेगा।
आगे क्या?
आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार ने राहत देने का फैसला लिया है। अब परिवार की नजर आगे की कानूनी कार्रवाई पर है। मां का कहना है कि जब तक आरोपियों पर केस नहीं चलता और भरत को शहीद का दर्जा नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
सरकार ने मुआवजे से मरहम लगाने की कोशिश की, लेकिन परिवार का कहना है कि बिना जवाबदेही तय किए ये काफी नहीं है। भरत तिवारी केस अब बिहार में कानून और इंसाफ के सवाल पर अटक गया है।
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