बिहार में शराबबंदी पर फिर छिड़ी बहस, पप्पू यादव ने मांगी समीक्षा, मांझी ने गुजरात मॉडल का दिया सुझाव
बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर सियासत तेज। सर्वे में समीक्षा की सिफारिश के बाद जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल की वकालत की। पप्पू यादव ने भी नीति में बदलाव की मांग की। होटलों के लिए अलग नियम और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया। JDU ने सर्वे एजेंसी को भेजा नोटिस।
पटना: बिहार में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है। एक सर्वेक्षण में नीति पर पुनर्विचार की सिफारिश के बाद सहयोगी और विपक्षी दल दोनों सरकार से समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
मांझी बोले- गुजरात मॉडल अपनाएं
HAM संरक्षक जीतन राम मांझी ने शराबबंदी को और सख्त बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि गुजरात मॉडल की तरह कानून को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि उल्लंघन पर लगाम लगे।
ढांचे की समीक्षा जरूरी
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी शराबबंदी पर दोबारा सोचने का समर्थन किया। दिल्ली से पटना लौटने पर उन्होंने कहा कि मौजूदा ढांचे की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए।
पप्पू यादव ने 3 बड़े सुझाव दिए:
1. स्कूल-मंदिर के आसपास प्रतिबंध पहले की तरह सख्त रहे
2. 5-7 स्टार होटलों के लिए अलग नियमों पर विचार हो
3. आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाए
उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी से राज्य को संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध कारोबार नेताओं-अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है।
JDU का रुख
सर्वे करने वाली एजेंसी को JDU द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार की सोच का सम्मान होना चाहिए। लेकिन किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है ताकि उसके फायदे-नुकसान देखे जा सकें।
एक तरफ सरकार शराबबंदी को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है, तो दूसरी तरफ सहयोगी और सांसद इसे लागू करने के तरीके में बदलाव चाहते हैं। सर्वे के बाद ये बहस अब नीति के भविष्य तक पहुंच गई है।
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