बिहार विधान परिषद में बड़ा फेरबदल! अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा, नीतीश के करीबी रामवचन राय बने कार्यकारी सभापति
बिहार विधान परिषद में NDA फॉर्मूले के तहत बड़ा बदलाव हुआ है। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह JDU के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के करीबी रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति के तौर पर पदभार संभाल लिया है।
पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा उलटफेर हुआ है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। NDA में हुए समझौते के फॉर्मूले के तहत अब सभापति की कुर्सी JDU के खाते में चली गई है।
'पार्टी का फैसला मंजूर, कोई गिला-शिकवा नहीं'
इस्तीफा देते हुए अवधेश नारायण सिंह ने कहा, "मुझे पार्टी का फैसला मंजूर है। किसी तरह का कोई गिला-शिकवा नहीं है। चार बार पार्टी ने मुझे सभापति बनाया है। आगे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाऊंगा।"
अवधेश के इस्तीफे के तुरंत बाद उपसभापति रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति के तौर पर कुर्सी संभाल ली।
पद संभालते ही रामवचन राय ने कहा, "मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलती है, मैं उस पर काम करता हूं। अवधेश नारायण सिंह जी के साथ पुराना संबंध रहा है। इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करूंगा।"
कौन हैं नए कार्यकारी सभापति रामवचन राय?
83 वर्षीय रामवचन राय जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ विधान पार्षद हैं और CM नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं। दिलचस्प बात ये है कि वह पहले RJD में थे। लालू यादव ने उन्हें 2004 में पहली बार MLC बनाया था। 2011 में JDU में आए और फिर उपसभापति बने। उनका मौजूदा कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक है।
आखिर क्यों हुआ ये बदलाव?
इसके पीछे NDA का पुराना फॉर्मूला है। समझौता था कि अगर विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा तो विधान परिषद के सभापति की कुर्सी JDU को मिलेगी।
नीतीश कुमार से करीबी की वजह से अवधेश नारायण सिंह अब तक इस पद पर बने हुए थे, जो बीजेपी कोटे से आते हैं। अब JDU ने अपना दावा ठोक दिया और आखिरकार ये कुर्सी JDU के पास आ गई।
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