बिहार में हर मुद्दे पर चढ़ रहा जाति का रंग: PMCH से भरत तिवारी तक, राजनीति में 'शॉर्टकट' बनी जातीय गोलबंदी
बिहार में हर मुद्दे को जातीय चश्मे से देखा जा रहा है। PMCH प्राचार्य हटाने, भरत तिवारी एनकाउंटर, CM का "हरा गमछा" बयान और पुलिस एनकाउंटर पर जातीय आरोप लग रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जाति अब राजनीति का शॉर्टकट बन गई है, जिससे असल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत एक बार फिर जातीय ध्रुवीकरण की गिरफ्त में दिख रही है। पीएमसीएच के प्राचार्य हटाए जाने से लेकर भरत तिवारी एनकाउंटर और सीएम के बयान तक, हर घटना को जातीय चश्मे से देखा जा रहा है। जानकार मानते हैं कि इससे लोकतंत्र के असल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
PMCH प्राचार्य हटाने पर शुरू हुआ विवाद
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा पटना मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाने के फैसले के बाद सियासत तेज है। डॉ. सिंह इसे 'तानाशाही' बता रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर इसे एक खास जाति के अफसर को टारगेट करने के तौर पर पेश किया जा रहा है।
इस कड़ी में नीट छात्रा रेप-मौत मामले में नाम आए प्रभात हॉस्पिटल के डॉ. सतीश सिंह का जिक्र भी होने लगा है। आरोप है कि हर प्रशासनिक कार्रवाई को जातीय आधार पर देखा जा रहा है।
भरत तिवारी एनकाउंटर बना सवर्ण बनाम पिछड़ा मुद्दा
भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को भी जातीय रंग दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर पिछड़ी और दलित बस्तियों में भरत तिवारी को नायक माना जाता है। लेकिन उनके ब्राह्मण समुदाय से होने के कारण कुछ सवर्ण संगठनों ने इसे 'फर्जी एनकाउंटर' बताकर विरोध शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि जिस शख्स को सभी जातियां मानती थीं, उसे अब जातीय घेरे में धकेला जा रहा है।
"हरा गमछा" बयान पर भी बवाल
पटना में AI समिट के दौरान CM सम्राट चौधरी के "हरा गमछा" वाले बयान पर भी विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा था कि एआई कैमरे से संदिग्धों को पकड़ना हो तो "हरा गमछा" वालों को टारगेट करें। इस बयान को एक विशेष जाति से जोड़कर सरकार पर हमले शुरू हो गए।
एनकाउंटर पर लगे जातीय आरोप
राज्य में चल रहे एनकाउंटर अभियान पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने सरकार पर एक खास जाति को निशाना बनाने का आरोप लगाया। वहीं RJD नेता भाई वीरेंद्र ने एक सूची जारी कर दावा किया कि कितने यादव अपराधियों का एनकाउंटर हुआ।
क्या कहते हैं जानकार
सियासी जानकारों के मुताबिक बिहार में जाति अब शॉर्टकट बन गई है। टिकट, मंत्रीपद से लेकर पुलिस कार्रवाई तक हर चीज को जाति के तराजू पर तोला जा रहा है। सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे समूह जातीय आवरण में अपनी बात रखकर दबाव बनाते हैं। नतीजा ये है कि रेप, एनकाउंटर या प्रशासनिक कार्रवाई जैसी कोई भी घटना जातीय रंग से अछूती नहीं रह पाती।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)