वोट चोरी पर INDIA गठबंधन का आंदोलन कितना चुनावी, कितना लोकतांत्रिक? जब मामला सुप्रीम कोर्ट में तो सड़क पर क्यों?
वोट चोरी और CEC ज्ञानेश कुमार के विरोध पर INDIA गठबंधन का आंदोलन कितना चुनावी वर्जिश है? 5 राज्यों में 2027 के चुनाव से पहले फिर मुद्दा जिंदा। सवाल - SIR का मामला जब सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल में है तो सड़क पर आंदोलन क्यों? पश्चिम बंगाल में 37.18 लाख अपील 19 ट्रिब्यूनल में लंबित, 22 लाख नाम कटने के केस, बिहार में 65 लाख नाम हटाने का केस SC में। क्या CJP के प्रदर्शन से घबराकर विपक्ष सड़क पर चेहरा दिखाने उतरा? 65 लाख वोट कटने का आरोप पर RJD के 47500 और कांग्रेस के 17500 BLA क्या कर रहे थे? BJP का दावा - 65 लाख में 22 लाख मृत, 35 लाख का पता नहीं, विपक्ष के पास काउंटर आंकड़ा क्यों नहीं? दो चुनाव आयुक्तों का विरोध बयान न छपता तो आंदोलन खुद दफन हो गया था।
नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन के नेतृत्व में वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा है, वो कितना चुनावी है और कितना लोकतांत्रिक, ये सवाल सबूत मांग रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये जनता को गोलबंद करने का तात्कालिक उपक्रम तो नहीं? क्योंकि इस आंदोलन की निरंतरता का इतिहास यही है - 2024 और 2025 चुनाव में उठा और चुनाव खत्म होते ही दम तोड़ दिया। अब 2027 में 5 राज्यों के चुनाव हैं तो फिर वोट चोरी और ज्ञानेश कुमार याद आ गए।
मामला सुप्रीम कोर्ट में तो आंदोलन क्यों?
SIR को लेकर लाखों मामले कोर्ट और ट्रिब्यूनल में लंबित हैं।
पश्चिम बंगाल में 37,18,452 अपील मामले 19 स्पेशल ट्रिब्यूनल के सामने पेंडिंग हैं, इनमें 22 लाख से ज्यादा मामले उन वोटरों के हैं जिनके नाम लिस्ट से हटाए गए।
बिहार में 65 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
सवाल है जब मामला न्यायालय में है तो सड़क पर क्यों? क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध से घबराकर इंडिया गठबंधन को सड़क पर चेहरा दिखाना पड़ा?
विपक्ष सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था का विरोध कर कैसा लोकतंत्र चाहता है?
वोट के अधिकार से वंचितों की कितनी चिंता?
विपक्ष वोट चोरी का स्वर उठा रहा है, पर आत्मावलोकन किया क्या?
कितने वोटरों के चेहरे पर फिर से वोट का अधिकार पाकर मुस्कान आई?
सवाल ये भी है - राजद के 47500 BLA और कांग्रेस के 17500 BLA क्या कर रहे थे? क्या वो अपने अधिकार-कर्तव्य से वाकिफ नहीं थे? चुनाव आयोग ने अपील, ट्रिब्यूनल की सुविधा दी थी, क्या उसका उपयोग कर कटे नाम जुड़वाने की मशक्कत की?
जो मुद्दा बूथ लेवल, पंचायत, ब्लॉक पर आसानी से सॉल्व हो सकता था, उसे मैक्रो लेवल पर ले जाना कितना सही?
मुख्य चुनाव आयुक्त ने मिलने से क्यों मना किया, ये समझना होगा। जब आपने वोट चोरी का आरोप लगाकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ही कर दी, तो कोर्ट में क्या सुना जाएगा?
आंकड़ों का खेल
विपक्ष का आरोप है 65 लाख लोगों को वोट के अधिकार से वंचित किया गया।
BJP का दावा है - 65 लाख में 22 लाख मृत पाए गए, 35 लाख का अता-पता नहीं।
तो विपक्ष काउंटर में ऐसा दस्तावेज क्यों नहीं दे पा रहा कि ये सही वोटर हैं, ये उनका आधार है, ये पता है और ये लिस्ट से बाहर हैं?
या तो BLA ने शुरू में मेहनत नहीं की, या वो जानकार नहीं थे। अगर होते तो आयोग के मौकों का सही उपयोग होता। ऐसा नहीं कर पाए तो हंगामा एक हथियार बन गया।
आंदोलन आपके हाथ में है, जब मन किया शुरू किया, चुनाव खत्म तो मुद्दा खत्म। अगर दो चुनाव आयुक्तों का विरोध बयान अखबार में न छपता तो वोट चोरी आंदोलन को विपक्ष खुद दफन कर चुका था।
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