MLC चुनाव में लालू यादव की मास्टर गुगली - MY से निकले, भूमिहार + ब्राह्मण को जोड़ा, BJP के 30 साल पुराने किले ढहाए, 0 से 2 सीटों पर RJD का परचम
8 MLC सीटों पर चुनाव में लालू यादव ने अपरोक्ष सक्रियता दिखाकर NDA खासकर BJP के लिए चेतावनी दी शून्य से 2 MLC बना लिए, तेजस्वी की A to Z थ्योरी के बाद लालू ने NDA के भूमिहार ब्राह्मण वोट में संभावना तलाशी MY तो बना हुआ है सवर्ण जोड़ो तो चमत्कार होगा समीकरण हिट हुआ, पटना शिक्षक सीट पर 30 साल से BJP के प्रो नवल किशोर यादव का कब्जा था लालू ने भूमिहार डॉ संजीव कुमार को उतारा JDU छोड़ RJD में आए थे भूमिहार प्लस मुस्लिम यादव गोलबंदी से किला ढहा, दरभंगा स्नातक में भी ब्राह्मण अनिल कुमार झा को उतारा मुस्लिम यादव समीकरण से दूसरी वरीयता में जीत पहले मीडिया ने BJP सर्वेश को जिताया था, वरिष्ठ पत्रकार दीपक कोचगवे बोले लालू जब सत्ता में थे भी सवर्ण मंत्री जगत बाबू रघुवंश बाबू रघुनाथ पांडेय साथ रहते थे वही फॉर्मूला फिर आजमाया 2029 लोकसभा 2030 विधानसभा से पहले संजीवनी बन सकती है JDU में गुटबाजी के बीच मौका।
पटना। इस MLC चुनाव के असली हीरो तेजस्वी नहीं, लालू यादव निकले। 8 सीटों में 0 से 2 सीट जीतकर RJD ने जो किया, वो BJP के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है।
लालू का समीकरण क्या था?
तेजस्वी A to Z थ्योरी लाए थे, पर इस चुनाव में सुप्रीमो लालू ने खुद मोर्चा संभाला।
लालू की सोच - "MY का वोट तो आज भी RJD के साथ है, अगर इसमें NDA का कोर वोट - भूमिहार और ब्राह्मण जोड़ दें तो चमत्कार हो सकता है।"
और वही हुआ। ये भूमिहार+ब्राह्मण+MY फॉर्मूला ऐसा हिट हुआ कि BJP से 2 सीटें छीनकर RJD की झोली में आ गईं।
सीट नंबर 1: पटना शिक्षक - 30 साल का किला ढहा
BJP के लिए सबसे बड़ा झटका।
यहां 30 साल से प्रो. नवल किशोर यादव का कब्जा था।
लालू ने गोटी बिछाई - भूमिहार डॉ. संजीव कुमार को उतारा।
संजीव पहले JDU में थे, RJD में आए तो टिकट मिला।
समीकरण: भूमिहार + मुस्लिम + यादव
रिजल्ट: 30 साल का BJP किला ध्वस्त।
सीट नंबर 2: दरभंगा स्नातक - सेकंड प्रेफरेंस में पलटी
ये सबसे फिल्मी जीत रही।
पहले मीडिया ने BJP के सर्वेश कुमार को जीता हुआ बता दिया।
जब दूसरी वरीयता के वोट खुले तो माला सर्वेश के गले से निकलकर RJD के अनिल कुमार झा के गले में पड़ गई।
यहां फॉर्मूला: ब्राह्मण (अनिल झा) + मुस्लिम + यादव
लालू की 'गुगली' क्यों चली?
वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं -
"लालू जब सत्ता में थे, तब भी उनके इर्द-गिर्द सवर्ण मंत्रियों की फौज रहती थी - जगत बाबू, रघुवंश बाबू, रघुनाथ पांडेय। वही पुराना सवर्ण प्रेम वाला फॉर्मूला लालू ने फिर आजमाया और काम कर गया।"
अब सवाल - क्या ये 2 सीटें 2029 लोकसभा और 2030 विधानसभा से पहले RJD के लिए संजीवनी बनेंगी? खासकर तब जब JDU में ललन vs संजय झा की गुटबाजी चरम पर है।
अगर RJD इस भूमिहार-ब्राह्मण+MY मॉडल पर टिकी रही, तो नए RJD का स्वरूप दिख सकता है।
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