1995 में बीजेपी के समर्थन से पहली बार CM बनी थीं मायावती, बनी थीं राज्य की पहली दलित महिला सीएम
साल 1995 में मायावती पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं। 39 साल की उम्र में 3 जून 1995 को शपथ ली। सपा-BSP गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी के समर्थन से सरकार बनी। ये यूपी की पहली दलित महिला CM थीं। सरकार सिर्फ 4 महीने चली, लेकिन इसने UP की राजनीति बदल दी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का नाम एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। चार बार CM रह चुकीं मायावती के सफर का सबसे अहम मोड़ आया था साल 1995 में, जब वो सिर्फ 39 साल की उम्र में पहली बार यूपी की सत्ता पर काबिज हुईं।
कैसे बना 1995 का समीकरण
1993 में SP-BSP ने मिलकर सरकार बनाई थी। मुलायम सिंह CM और BSP साझेदार थी। लेकिन 2 साल में ही दोनों के बीच मतभेद गहरे हो गए और गठबंधन टूट गया।
इसके बाद मायावती ने मुलायम सरकार से समर्थन वापस ले लिया। उनके पास खुद बहुमत नहीं था। ऐसे में बीजेपी ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया।
3 जून 1995: ऐतिहासिक शपथ
बीजेपी के समर्थन के दम पर 3 जून 1995 को मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वो यूपी की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं। देश के सबसे बड़े राज्य में एक दलित महिला का शीर्ष पद तक पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक था।
सिर्फ 4 महीने चला कार्यकाल
मायावती की ये सरकार ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। अक्टूबर 1995 में सरकार गिर गई और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा। लेकिन इन 4 महीनों में उन्होंने अपनी सियासी ताकत साबित कर दी।
BJP-BSP का नया रिश्ता
1995 का ये गठजोड़ सिर्फ एक सरकार नहीं थी। इसी से बीजेपी और BSP के बीच राजनीतिक तालमेल की शुरुआत हुई। आगे चलकर दोनों कई बार एक-दूसरे के साथ आए। 1995 के बाद मायावती 1997, 2002 और 2007 में फिर CM बनीं। 2007 में उन्होंने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और 5 साल का कार्यकाल पूरा किया।
कांशीराम से शुरू हुआ सफर
दिल्ली में नौकरी के दौरान कांशीराम से मुलाकात के बाद मायावती राजनीति में आईं। 1984 में BSP बनी और 1989 में बिजनौर से सांसद बनकर वो राष्ट्रीय पटल पर उभरीं।
1995 में बीजेपी के समर्थन से शुरू हुआ सफर ही वो टर्निंग पॉइंट था जिसने मायावती को यूपी की सबसे ताकतवर नेताओं में खड़ा कर दिया। जिस महिला ने पहले गठबंधन से सत्ता पाई, उसी ने बाद में अपने दम पर यूपी में बहुमत की सरकार बनाकर इतिहास रचा।
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