नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: स्पाइसजेट में नौकरी का झांसा देकर 500 से ज्यादा युवाओं से की ठगी, 4 गिरफ्तार...
नोएडा के सेक्टर-2 में फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया। स्पाइसजेट में नौकरी दिलाने के नाम पर 500 से ज्यादा लोगों से ठगी। 4 आरोपी गिरफ्तार जिनमें दो सगे भाई शामिल। आरोपी फर्जी ऑफर लेटर भेजकर रजिस्ट्रेशन फीस वसूलते थे। पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप और बैंक कार्ड बरामद किए।
नोएडा। फेज-1 थाना पुलिस ने रविवार को सेक्टर-2 में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मौके से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग प्राइवेट एयरलाइन में नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के युवाओं से ठगी कर रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में सुदेश सिंह और बृजेश भदौरिया सगे भाई हैं। इसके अलावा अर्जुन और संदीप तिवारी को भी पकड़ा गया है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह पिछले 18 महीने से इस ठगी को अंजाम दे रहा था।
कैसे करते थे ठगी
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि शनिवार रात गश्त के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-2 की सी-76 बिल्डिंग में कॉल सेंटर चल रहा है। छापे में 4 लोग लैपटॉप और मोबाइल से लोगों से बात करते मिले।
आरोपी जॉब वेबसाइटों से बेरोजगार युवाओं का डेटा निकालते थे। फिर उन्हें फोन कर स्पाइसजेट एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का लालच देते थे। पीड़ितों के व्हाट्सएप पर फर्जी ऑफर लेटर भेजते और रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसा अपने बैंक खातों में मंगवा लेते थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने अब तक 500 से अधिक लोगों से पैसे ऐंठे हैं। उनके मोबाइल और बैंक खातों के खिलाफ NCRP पोर्टल पर 20 साइबर शिकायतें दर्ज मिली हैं।
गिरोह का मास्टरमाइंड कौन
जांच में पता चला कि संदीप तिवारी पहले स्पाइसजेट में काम कर चुका है। उसने 2 साल पहले नौकरी छोड़ी थी। एयरलाइन की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी होने के कारण वह लोगों का भरोसा आसानी से जीत लेता था। इसी ने सगे भाइयों के साथ मिलकर ठगी की साजिश रची।
आरोपी अर्जुन गांव के मजदूरों और दोस्तों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड खुलवाता था। एक सिम से 10-15 लोगों को ठगते थे। हर दिन 30 से 40 हजार की ठगी का टारगेट तय था। इस्तेमाल के बाद सिम तोड़कर फेंक देते थे।
क्या बरामद हुआ
पुलिस ने मौके से 8 मोबाइल, 1 लैपटॉप, 9 डेबिट कार्ड, 13 सिम कार्ड, 4 यूपीआई साउंड बॉक्स और 3 म्यूल अकाउंट की पासबुक बरामद की है। आरोपियों ने पहले दिल्ली में भी कॉल सेंटर चलाया था और 2 महीने पहले नोएडा शिफ्ट हुए थे।
पुलिस अब आरोपियों की संपत्ति की जांच कर रही है और अन्य पीड़ितों से संपर्क कर रही है।
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