UP Politics 2027: हर तीसरे विधायक ने बदली पार्टी, BJP-SAP में सबसे ज्यादा ‘आयाराम-गयाराम’

यूपी विधानसभा के 399 विधायकों में से 122 ने कम से कम एक बार पार्टी बदली है। आंकड़ों में BJP सबसे आगे, 78 विधायक दूसरे दलों से आए। छोटे दल निषाद पार्टी, सुभासपा, RLD में भी दलबदल का आंकड़ा बड़ा है। 2027 से पहले 35-40% विधायकों के टिकट कटने की चर्चा।

Jul 30, 2026 - 19:28
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UP Politics 2027: हर तीसरे विधायक ने बदली पार्टी, BJP-SAP में सबसे ज्यादा ‘आयाराम-गयाराम’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति का पुराना फॉर्मूला फिर चर्चा में है। चुनाव नजदीक आते ही निष्ठाएं बदलती हैं और झंडे का रंग पल भर में बदल जाता है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि यूपी विधानसभा में "आयाराम-गयाराम" का ट्रेंड अब रिकॉर्ड स्तर पर है।

विधानसभा के 399 मौजूदा विधायकों में से 122 विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अपने करियर में कम से कम एक बार पार्टी बदली है। यानी हर तीसरा विधायक किसी न किसी समय दल बदल चुका है।

किस पार्टी में कितने दलबदलू
आंकड़ों के हिसाब से दलबदलुओं को सबसे ज्यादा जगह देने वाली पार्टी BJP है। 'कांग्रेस मुक्त भारत' की बात करने वाली भाजपा में ही 78 विधायक दूसरे दलों से आकर शामिल हुए हैं।

विपक्ष में सपा भी इस मामले में पीछे नहीं है। अखिलेश यादव की पार्टी में 29 विधायक बाहरी पृष्ठभूमि से हैं।

छोटे सहयोगी दलों में तो स्थिति और दिलचस्प है:  
निषाद पार्टी: 80% विधायक पाला बदलकर आए  
सुभासपा: 50% विधायक दलबदलू  
RLD: 33% विधायक बाहरी  
अपना दल एस: लगभग 31% विधायक पार्टी बदल चुके  
कांग्रेस: बचे हुए विधायकों में से आधे किसी और दल से आए हैं

सांसदों में भी यही हाल  
ये खेल सिर्फ लखनऊ तक नहीं है। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा के 19 और भाजपा के 15 सांसद भी दल बदलकर संसद पहुंचे हैं।

दलबदल के 'चैंपियन' कौन  
इस सूची में सबसे ऊपर नाम दारा सिंह चौहान का आता है। उन्होंने बसपा, भाजपा, सपा और फिर भाजपा का दामन थामा। आज वे योगी सरकार में मंत्री हैं। नंद गोपाल नंदी, राकेश सचान और एसपी सिंह बघेल जैसे नेता भी कई बार पार्टी बदल चुके हैं।

नेता चोला क्यों बदलते हैं?  
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 4 बड़ी वजहें हैं:  
1. सत्ता का मोह: सरकारी संसाधनों तक पहुंच  
2. टिकट का डर: चुनाव से पहले सुरक्षित सीट की तलाश  
3. जातीय गणित: अपने क्षेत्र के हिसाब से पार्टी चुनना  
4. विनेबिलिटी: किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना

2027 का समीकरण  
ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 35 से 40% विधायकों के टिकट कट सकते हैं। ऐसे में दलबदल का नया दौर तय माना जा रहा है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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