झारखंड में स्वास्थ्य कर्मियों का विरोध तेज: काले बिल्ले से शुरू हुआ आंदोलन, महीने के अंत में सचिवालय घेरेंगे...
झारखंड में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने 5 चरण का आंदोलन शुरू किया। पहले काला बिल्ला, फिर प्रदर्शन, भूख हड़ताल और अंत में 27 जुलाई को रांची में सचिवालय घेराव। MPW समेत अन्य कर्मी 18 साल से लंबित मांगों को लेकर नाराज। अस्पतालों में सेवा जारी रहेगी।
रांची। अपनी मांगों को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य कर्मचारी सोमवार से सड़कों पर उतर आए हैं। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह आंदोलन कुल 5 चरणों में चलेगा।
संघ का आरोप है कि बीते कई सालों से उनकी सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने क्रमिक विरोध का रास्ता चुना है।
क्या है आंदोलन की रूपरेखा
- 13 से 16 जुलाई: ड्यूटी के दौरान काला बिल्ला बांधकर काम
- 17 से 20 जुलाई: काम के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन
- 21 से 23 जुलाई: सांकेतिक भूख हड़ताल
- 24 और 25 जुलाई: सभी जिलों में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना
- 27 जुलाई: रांची स्थित नेपाल हाउस में स्वास्थ्य सचिवालय का घेराव
पहले चरण में अस्पतालों और PHC-CHC में इलाज प्रभावित नहीं होगा। कर्मचारी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर और नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
MPW कर्मी सबसे ज्यादा नाराज
संघ से जुड़े MPW कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब 18 सालों से टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं को जमीन पर चला रहे हैं। बावजूद इसके वेतन, नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं की मांगें अब तक अधर में हैं।
संघ ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने बातचीत कर समस्या का हल नहीं निकाला तो 27 जुलाई के बाद आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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