Patna Graduate MLC Election 2026: नीरज कुमार, अनुज सिंह और दिलीप कुमार के साथ कौन-कौन? बाहुबली फैक्टर पर नजर

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के MLC चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ वोटर और संगठन के दम पर नहीं दिख रहा। अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन में प्रभावशाली नेताओं की सक्रियता ने चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। नीरज कुमार, अनुज कुमार सिंह और दिलीप कुमार के साथ कौन खड़ा है, जानिए पूरी कहानी।

Oct 16, 2026 - 18:58
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Patna Graduate MLC Election 2026: नीरज कुमार, अनुज सिंह और दिलीप कुमार के साथ कौन-कौन? बाहुबली फैक्टर पर नजर

पटना: बिहार में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव आम चुनावों से काफी अलग होते हैं। यहां जीत का गणित सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होता है। मतदाता सीमित होते हैं, लेकिन उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए संगठन, संपर्क, संसाधन और वोटर मैनेजमेंट की अहम भूमिका रहती है।

इस बार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इन पारंपरिक समीकरणों से आगे निकलता दिखाई दे रहा है। चुनावी मैदान में उम्मीदवारों के साथ अब कुछ ऐसे प्रभावशाली चेहरे भी नजर आ रहे हैं, जिनकी राजनीतिक पकड़ और क्षेत्रीय प्रभाव की चर्चा लंबे समय से होती रही है।

यही वजह है कि पटना स्नातक चुनाव में अब एक सवाल तेजी से पूछा जा रहा है—किस उम्मीदवार के साथ कौन सा प्रभावशाली नेता खड़ा है?
नीरज कुमार के साथ अखिलेश सरदार

जेडीयू के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। उनका पहला कार्यकाल 2008 से 2014, दूसरा 2014 से 2020 और तीसरा 2020 से 2026 तक रहा है।
नीरज कुमार के चुनावी अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के बीच इस बार उनके समर्थन में अखिलेश सिंह सरदार की सक्रियता भी चर्चा में है।
नवादा क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रभाव रखने वाले अखिलेश सरदार को नीरज कुमार के नामांकन और चुनावी गतिविधियों के दौरान उनके साथ देखा गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि नीरज कुमार के चुनावी अभियान में उनका स्थानीय प्रभाव भी अहम भूमिका निभा सकता है।

अनुज कुमार सिंह के साथ अनंत सिंह
दूसरी तरफ जन सुराज पार्टी ने डॉक्टर अनुज कुमार सिंह को पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। उनके चुनावी अभियान को उस समय खास चर्चा मिली, जब मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने उनके समर्थन का ऐलान किया।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह का समर्थन ऐसे उम्मीदवार को मिला है जो जेडीयू के मौजूदा उम्मीदवार नीरज कुमार के मुकाबले मैदान में है।
यानी एक तरफ जेडीयू का आधिकारिक उम्मीदवार है, तो दूसरी तरफ उसी पार्टी के एक प्रमुख विधायक की पसंद अलग उम्मीदवार के साथ दिखाई दे रही है। इससे पटना स्नातक चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा भी इस समर्थन के पीछे एक वजह के तौर पर की जा रही है।

दिलीप कुमार के लिए अशोक महतो का समर्थन
राजद ने इस चुनाव में दिलीप कुमार पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। दिलीप कुमार इससे पहले भी पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उन्हें हजारों वोट मिले थे।

इस बार राजद के उम्मीदवार के तौर पर दिलीप कुमार की नजर खास तौर पर कुर्मी, मुस्लिम और यादव वोट बैंक पर बताई जा रही है।
इसी बीच उनके समर्थन में अशोक महतो की सक्रियता भी चुनावी चर्चा का विषय बनी हुई है।
अशोक महतो का नाम बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहा है। उनके खिलाफ अतीत में कई गंभीर आपराधिक मामलों का उल्लेख मिलता रहा है। हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में आरोप और दोषसिद्धि को एक समान नहीं माना जा सकता।

तीन उम्मीदवार, तीन अलग समीकरण
पटना स्नातक चुनाव में इस बार तस्वीर इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि प्रमुख उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग राजनीतिक और प्रभावशाली चेहरे दिखाई दे रहे हैं।

जेडीयू के नीरज कुमार — अखिलेश सरदार का समर्थन
जन सुराज के अनुज कुमार सिंह — अनंत सिंह का समर्थन
राजद के दिलीप कुमार — अशोक महतो का समर्थन

ऐसे में मुकाबला केवल पार्टियों और उम्मीदवारों के बीच नहीं रह गया है। अब व्यक्तिगत प्रभाव, क्षेत्रीय पकड़, संगठन और वोटर नेटवर्क भी चुनावी परिणाम को प्रभावित करने वाले फैक्टर माने जा रहे हैं।
असली फैसला वोटर करेंगे

हालांकि, किसी भी चुनाव में प्रभावशाली नेताओं का समर्थन अपने आप में जीत की गारंटी नहीं होता। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का व्यवहार सामान्य चुनावों से अलग होता है और यहां उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, मतदाताओं से संपर्क तथा चुनावी प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

अब देखना होगा कि नीरज कुमार अपना पुराना दबदबा बरकरार रख पाते हैं या अनुज कुमार सिंह और दिलीप कुमार जैसे उम्मीदवार नए समीकरणों के सहारे मुकाबले को पलट देते हैं।
पटना स्नातक चुनाव में इस बार ‘बाहुबली फैक्टर’ कितना असर डालता है, इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगा।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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