सिवान AK-47 फायरिंग पर तेजस्वी का 'राजभवन मार्च'...पिताजी वाला फॉर्मूला, क्या मिलेगा पॉलिटिकल माइलेज?

सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 फायरिंग के विरोध में 19 अगस्त को तेजस्वी यादव राजभवन मार्च करेंगे। 2014 में लालू भी इसी हथियार से विपक्ष में वापसी कर चुके हैं। जानकार बोले- बुझी आग से चिंगारी निकालने की कोशिश। मामला अब SC में।

Aug 13, 2026 - 18:07
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सिवान AK-47 फायरिंग पर तेजस्वी का 'राजभवन मार्च'...पिताजी वाला फॉर्मूला, क्या मिलेगा पॉलिटिकल माइलेज?

पटना: बिहार में एक बार फिर सियासत सड़क पर उतरने वाली है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को राजभवन मार्च का ऐलान किया है। मुद्दा है सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग।

पिताजी वाला पुराना फॉर्मूला  
राजभवन मार्च बिहार की राजनीति में विपक्ष का पुराना हथियार है। 2014 में लालू यादव ने भी 13 विधायकों की बगावत के बाद इसी मार्च से दबाव बनाया था। नतीजा- 9 विधायक वापस लौट आए थे।  
अब तेजस्वी उसी रास्ते पर चलकर सिवान मुद्दे को भुनाने की कोशिश में हैं।

बुझी आग से चिंगारी निकालने की कोशिश?  
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तेजस्वी छात्र आंदोलन की बुझ चुकी आग से चिंगारी निकाल रहे हैं। NEET आंदोलन के समय तेजस्वी विदेश में थे। उस वक्त राजद की भूमिका तय नहीं हो पाई और माले की छात्र इकाई AISA आगे निकल गई। बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद अब तेजस्वी एक्टिव हुए हैं। आलोचक कह रहे हैं- का वर्षा जब कृषि सुखाने।

सिवान गोलीकांड: अब तक क्या हुआ?  
25 जुलाई को सिवान के JP चौक पर छात्र प्रदर्शन के दौरान फायरिंग हुई। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने माना कि AK-47 से हवा में फायरिंग की गई। जवान अभिषेक पटेल निलंबित।  
इस घटना में 3 लोग घायल हुए- आकाश यादव, 15 साल के मोहम्मद आरिफ और बुलेट कुमार। पुलिस का दावा- भीड़ से बचाव में हवा में गोली चली। विपक्ष का आरोप- छात्रों पर सीधी फायरिंग हुई।

मामला कोर्ट में, मार्च का असर?  
सरकार ने कमिश्नर-डीआईजी की ज्वाइंट जांच कमेटी बनाई है। वहीं RJD सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में PIL भी दायर की है। ऐसे में तेजस्वी का मार्च कितना असर डाल पाएगा, ये देखना बाकी है।

तेजस्वी के लिए ये मार्च खोया आत्मविश्वास वापस लाने की कोशिश है। लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो सड़क की राजनीति कितनी काम आएगी - ये बड़ा सवाल है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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