NEET से रामपुर तक सड़कों पर छात्र, अखिलेश यादव बोले - 'जौहर यूनिवर्सिटी बचाने से बचेगा भविष्य'

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ और रामपुर में मौलाना आजाद जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर कार्रवाई के विरोध में छात्र आंदोलन तेज हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों आंदोलनों का समर्थन करते हुए केंद्र और यूपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ी है और सरकार विपक्षी आवाजों को दबा रही है। रामपुर में छात्र चौथे दिन भी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

Jul 23, 2026 - 18:15
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 NEET से रामपुर तक सड़कों पर छात्र, अखिलेश यादव बोले - 'जौहर यूनिवर्सिटी बचाने से बचेगा भविष्य'
 NEET से रामपुर तक सड़कों पर छात्र, अखिलेश यादव बोले - 'जौहर यूनिवर्सिटी बचाने से बचेगा भविष्य'

नई दिल्ली/रामपुर: देश में दो अलग-अलग जगहों पर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है। दिल्ली में NEET-UG पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है, तो वहीं उत्तर प्रदेश के रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए छात्र-छात्राएं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

अखिलेश ने दोनों आंदोलन को दिया समर्थन  
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दोनों आंदोलनों का जिक्र किया।  
उन्होंने लिखा, "दिल्ली में परीक्षा का आंदोलन चल रहा है और रामपुर में शिक्षा का। जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने से ही यहां के छात्रों का भविष्य बचेगा।"  
सपा का एक प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचा और छात्रों की मांगों का समर्थन किया।

अखिलेश ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय से हजारों छात्रों का भविष्य जुड़ा है और प्रशासन को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए।

सरकार पर बोला हमला  
सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा, "हिटलर की सरकार में भी ऐसा होता था कि अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस की वर्दी पहनाकर विरोधियों की पिटाई करवाई जाती थी।"  
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

रामपुर में चौथे दिन भी धरना  
रामपुर में जिला प्रशासन ने शनिवार को जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया था। इसके बाद से छात्र कैंपस के बाहर डटे हैं।  
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी है। कार्रवाई से पहले छात्रों के हितों को ध्यान में रखा जाए। छात्रों ने आंदोलन के दौरान उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और तेज होता है।

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