शस्त्र लाइसेंस घोटाले में फंसे सांसद अफजल अंसारी, 51 लाइसेंस पर बेचे गए 145 हथियार

गाजीपुर में शस्त्र लाइसेंस में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 51 लाइसेंसों पर 145 हथियारों की खरीद-बिक्री की गई। इस मामले में सपा सांसद अफजल अंसारी और दो तत्कालीन लिपिकों के खिलाफ कोतवाली में FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि मुख्तार अंसारी के IS-191 गिरोह के लोगों के नाम पर जारी लाइसेंसों की फाइलें अभिलेखागार से गायब कर दी गईं ताकि हथियारों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो सके। पुलिस कई राज्यों में जाकर रिकॉर्ड का सत्यापन कर चुकी है।

Jul 23, 2026 - 18:08
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शस्त्र लाइसेंस घोटाले में फंसे सांसद अफजल अंसारी, 51 लाइसेंस पर बेचे गए 145 हथियार

गाजीपुर: लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद अफजल अंसारी शस्त्र लाइसेंस में हुई गड़बड़ी के मामले में पुलिस के निशाने पर हैं। जिले में 51 शस्त्र लाइसेंसों के सहारे 145 हथियारों की खरीद-बिक्री का मामला सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस ने सांसद और दो लिपिकों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

कैसे हुआ खुलासा  
SP डॉ. ईरज राजा के मुताबिक, मुख्तार अंसारी और उनके परिवार से जुड़े IS-191 गिरोह के सदस्यों-सहयोगियों के नाम पर जारी लाइसेंसों की 2 महीने तक जांच चली। पुलिस टीम ने UP के अलावा दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश तक जाकर लाइसेंस और दुकानों का सत्यापन किया। जांच में पता चला कि 51 लाइसेंसों पर कुल 145 हथियार खरीदे-बेचे गए।

फाइलें गायब, मिलीभगत का आरोप  
आरोप है कि ये पूरी करतूत कलेक्ट्रेट के तत्कालीन शस्त्र लिपिक अशफाक अहमद और गौरी शंकर राम की मदद से अंजाम दी गई। अभिलेखागार से शस्त्र लाइसेंस और खरीद-बिक्री से जुड़ी पत्रावलियां गायब मिलीं। सांसद अफजल अंसारी के नाम का लाइसेंस संख्या 1188 P2 और उस पर खरीदी गई राइफल नंबर 830405 का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।  
पुलिस का कहना है कि रिकॉर्ड इसलिए गायब कराया गया ताकि हथियारों का पता न चल सके और इन्हें IS-191 गिरोह आपराधिक कामों में इस्तेमाल कर सके।

30 साल पुराना कनेक्शन  
पुलिस के अनुसार 30 साल पहले भी मऊ, आजमगढ़ और गाजीपुर से फर्जी लाइसेंस जारी करने के मामले सामने आए थे। जांच में पता चला कि आरोपी प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बचते रहे।

IS-191 गिरोह क्या है  
IS-191 मुख्तार अंसारी का कुख्यात अंतर-राज्यीय गिरोह है जो 1997 में बना था। इसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला है। गिरोह पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और सरकारी ठेकों में धांधली के 65 से ज्यादा केस दर्ज हैं। मुख्तार की मौत के बाद पुलिस 'ऑपरेशन वज्र' के तहत इसके सदस्यों और अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई कर रही है।

अधिकारियों का बयान  
वाराणसी के DIG वैभव कृष्णा ने कहा कि लापरवाही पाए जाने पर दो लिपिकों पर FIR की गई है। इसी तरह के अन्य मामलों की भी जांच चल रही है। दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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