एनकाउंटर सही था तो नौकरी क्यों? भरत तिवारी केस पर CM सम्राट के ऐलान से उठे सवाल, विपक्ष ने मांगा जवाब
बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर पर सियासत तेज। CM सम्राट चौधरी ने परिवार को आर्थिक मदद और नौकरी देने का ऐलान किया। विपक्ष बोला- अगर कार्रवाई सही थी तो मुआवजा क्यों? सरकार पर पारदर्शिता और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव।
पटना: बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा। ये सीधे नीतीश सरकार की पुलिस नीति पर सवाल बन गया है।
CM का ऐलान
CM सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। सरकार का कहना है कि ये फैसला न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। मानवीय आधार पर ये कदम सही भी लगता है।
लेकिन सवाल खड़े हो गए
अगर पुलिस की कार्रवाई जायज थी और भरत तिवारी अपराधी थे, तो फिर मुआवजा और नौकरी क्यों? पुलिस ने शुरुआत में उन्हें अपराधी बताया था। अब सरकार के इस कदम से कई सवाल उठ रहे हैं:
1. क्या आगे हर एनकाउंटर के बाद ऐसा ही होगा?
2. जिनके हाल में एनकाउंटर हुए, उनके परिवारों को भी क्या मिलेगा?
3. जांच में आखिर क्या सामने आया?
विपक्ष हमलावर
RJD और कांग्रेस ने सरकार से सफाई मांगी है। उनका कहना है कि सिर्फ राहत का ऐलान काफी नहीं। सरकार को बताना होगा कि गलती किसकी थी, गोली चलाने का आदेश किसने दिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी।
पारदर्शिता जरूरी
सरकार ने ये नहीं कहा कि एनकाउंटर फर्जी था। लेकिन अंतरिम रिपोर्ट में ऐसा क्या मिला जिसके आधार पर नौकरी-मुआवजा दिया गया, ये जनता को बताना जरूरी है।
बिहार में अपराध के खिलाफ सख्ती जरूरी है, लेकिन इसका मतलब पुलिस को मनमानी की छूट नहीं हो सकती। हर एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सरकार एक तरफ पुलिस का मनोबल बढ़ाना चाहती है, दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को राहत भी दे रही है। दोनों साथ चल सकते हैं, लेकिन इसके लिए पूरा सच सामने लाना होगा। वरना ये एक गलत परंपरा की शुरुआत बन सकती है।
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