Gen-Z के दबाव में झुकीं सरकारें, भाजपा से लेकर हेमंत सोरेन तक ने बदली रणनीति...
आभासी दुनिया से निकली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सतह पर आते ही Gen-Z देश की राजनीति का सेंटर बन गया है। भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को अपना बताकर डैमेज कंट्रोल किया। झारखंड में हेमंत सोरेन ने 2014 के बाद की JPSC-CGL परीक्षाएं रद्द कीं। तेजस्वी, राहुल गांधी, PK और ममता भी Gen-Z के मुद्दों पर एक्टिव।
नई दिल्ली: आभासी दुनिया की उपज CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के जमीन पर आते ही पूरे देश की पार्टियों को अब Gen-Z की चिंता सताने लगी है। कभी मजाक में ली गई ये ताकत अब सत्ता के समीकरण बदल रही है।
सरकारों का झुकना शुरू
Gen-Z के उग्र होते ही सबसे पहला एक्शन भाजपा ने लिया। अपने पसंदीदा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करा लिया। ये NEET पेपर लीक और छात्र आक्रोश को शांत करने की रणनीति थी।दूसरा बड़ा फैसला झारखंड से आया। हेमंत सोरेन सरकार ने 2014 और उसके बाद की JPSC, CGL जैसी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया। छात्रों की एक मांग को छोड़कर बाकी सभी मान ली गईं। संकेत साफ है - कोई भी सरकार Gen-Z की अनदेखी नहीं कर सकती।
भाजपा-RSS की नई रणनीति
युवाओं के गुस्से को देखते हुए भाजपा ने ट्रैक बदला है।
PM मोदी को CJP आंदोलन के दौरान रील बनाकर Gen-Z को भरोसा दिलाना पड़ा कि सरकार उनकी चिंता करती है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत को कहना पड़ा कि “CJP में शामिल युवा हमारे अपने बच्चे हैं।
पहले कृषि कानून वापसी की तरह ही इस बार भी भाजपा ने दिखाया कि विरोध बढ़ने पर फैसला पलटने में उसे हिचक नहीं।
भाजपा-संघ अब युवाओं से लगातार संवाद की नई सीरीज शुरू कर रहे हैं।
विपक्ष भी चकरघिन्नी मोड में
Gen-Z ने स्थापित दलों को भी घुमा दिया है:
राहुल गांधी घूम-घूम कर छात्रों की गूंज सुन रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने बिहार में शिक्षा-रोजगार के मुद्दे पर लोक भवन मार्च किया।
प्रशांत किशोर इसी मुद्दे पर जिलों का दौरा कर रहे हैं।
ममता बनर्जी भी CJP आंदोलनकारियों से सहानुभूति जता चुकी हैं।
AAP पर तो CJP का संरक्षक होने का टैग ही लग गया है।
विपक्ष का मकसद साफ है - किसी तरह मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर सत्ता में वापसी।
Gen-Z इतना अहम क्यों?
UN World Population Prospects 2024 के मुताबिक भारत में 14 से 30 साल के बीच 40.7 करोड़ आबादी है। दुनिया की कुल Gen-Z आबादी का 26-28% अकेले भारत में है. यानी 2029 लोकसभा चुनाव तक यही वर्ग निर्णायक होगा। जिसके हाथ में इस युवा भारत की कमान होगी, उसे हराना आसान नहीं। इसलिए मोदी-भागवत भारी मन से भी युवाओं को अपना बता रहे हैं।
दिमागी नक्सल पर बिलबिलाहट क्यों?
PM मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से 'दिमागी नक्सल' शब्द कहा तो विपक्ष खुद को उसी कतार में खड़ा करने लगा। जबकि 13 अप्रैल 2006 को तत्कालीन PM मनमोहन सिंह ने भी नक्सलवाद को “देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती” बताया था। तब कांग्रेस को ये सच लगा था, अब वही बात मोदी ने कही तो विपक्ष बिलबिला उठा।
CJP और Gen-Z ने साबित कर दिया है कि सरकार के पास समाधान की गुंजाइश है, जबकि विपक्ष के पास सिर्फ अराजकता फैलाने का मौका। 2029 की सत्ता की चाबी अब इसी 40 करोड़ युवा आबादी के हाथ में है।
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