PK और तेजस्वी के माइंड गेम से NDA की साख पर सवाल, क्या सुपर CM बनकर लौटेंगे नीतीश?
बिहार में बांकीपुर हार के बाद CM सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव का डबल अटैक। PK का नैरेटिव- CM डर गए, एनकाउंटर भूल गए। NDA की शासकीय दक्षता पर सवाल, साख बहाल करने के लिए अक्टूबर से नीतीश कुमार की यात्रा की चर्चा। क्या नीतीश ही सुपर CM बनकर संकट से निकालेंगे?
पटना: बांकीपुर उपचुनाव में BJP के गढ़ में हार के बाद बिहार में सम्राट चौधरी सरकार सवालों के घेरे में है। प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव के डबल अटैक से NDA बैकफुट पर दिख रही है। चर्चा है कि नीतीश शासन के इकबाल के मुकाबले मौजूदा सरकार का प्रभाव कम हुआ है।
PK का माइंड गेम: 'CM डर गए हैं'
जीत के बाद प्रशांत किशोर लगातार CM सम्राट चौधरी पर हमलावर हैं। जब से बांकीपुर का रिजल्ट आया, सम्राट चौधरी एनकाउंटर शब्द बोलना भूल गए हैं। यही वोट की ताकत है। मुख्यमंत्री की भाषा बदल गई।
PK का दावा है - पहले CM हाफ-फुल एनकाउंटर, गमछा देखकर पकड़ने की बात करते थे, अब फैक्ट्री, रोजगार मेला, पढ़ाई की बात करने लगे हैं। जनता ने BJP के 30 साल पुराने किले को ढहा दिया, सरकार को समझ आ गया कि जनता बच्चों के भविष्य पर वोट देती है, एनकाउंटर पर नहीं। जनसुराज माइंड गेम में BJP से आगे है।
सरकार की अथॉरिटी पर चोट
सवाल उठ रहा है - BJP, PK को जवाब क्यों नहीं दे पा रही? अगर यही रहा तो सरकार की हर उपलब्धि पर विपक्ष कहेगा कि ये डर से किया गया काम है, मंशा से नहीं। ये किसी भी सरकार की अथॉरिटी के लिए खतरनाक है।
क्या नीतीश ही निकालेंगे संकट से?
साख बहाल करने के लिए नीतीश कुमार अक्टूबर से यात्रा पर निकल सकते हैं। जानकारों का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही विश्वसनीयता लौटाता है। 2025 में स्वास्थ्य और अंतिम पारी वाले नैरेटिव को नीतीश ने जनसमर्थन से ही हराया था।
यात्रा से सम्राट सरकार को फायदा या नुकसान?
ये यात्रा दोधारी तलवार है:
फायदा: लव-कुश (नीतीश-सम्राट) एकता से जो सामाजिक समीकरण ढीला पड़ रहा है, वो मजबूत होगा। अतिपिछड़ी जातियों में जोश आएगा, जो सरकार के लिए संजीवनी होगी। कहा जाता है नीतीश ने इसी एकता को ध्यान में रखकर सम्राट को CM बनने में मदद की थी।
साइड इफेक्ट: यात्रा हिट हुई तो फिर 'नीतीश ही बिहार चला सकते हैं, सुपर CM' वाला नैरेटिव मजबूत होगा। इससे CM सम्राट चौधरी की छवि कमजोर पड़ सकती है और 46 साल बाद BJP को मिला शासन का मौका निरर्थक लगने लगेगा।
BJP के बड़े नेता बिहार क्यों नहीं आ रहे?
इसका एक कारण है - नीतीश के रहते केंद्रीय नेता सीधे एक्टिव नहीं हो सकते, गलत संदेश जाएगा। नीतीश भले राज्यसभा जाकर दिल्ली चले गए हैं, लेकिन आज भी सरकार के असली मेंटर वही हैं। BJP नेतृत्व मान रहा है कि तात्कालिक संकट का समाधान भी वही निकालेंगे। अभी फायदे-नुकसान से ज्यादा जरूरी है सम्राट सरकार के प्रताप को बचाए रखना।
बांकीपुर में एक अकेले विधायक PK की CM सम्राट से सीधी लड़ाई में NDA की प्रतिष्ठा दांव पर है। क्या नीतीश की यात्रा सरकार की दक्षता बहाल करेगी या सुपर CM बनकर फिर सेंटर में आ जाएंगे, ये अक्टूबर में तय होगा।
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