नीतीश के 2 सिपहसालार बियाबान में भटके, RCP सिंह को JDU में No Entry, मनीष वर्मा साइडलाइन, संजय झा-ललन सिंह का राज

20 साल तक नीतीश के सबसे करीबी रहे 2 IAS - RCP सिंह और मनीष वर्मा अब सियासी हाशिए पर, एक JDU से बाहर, दूसरा संगठन में गुमनाम, उत्तराधिकारी का सपना टूटा।

Sep 24, 2026 - 17:17
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नीतीश के 2 सिपहसालार बियाबान में भटके, RCP सिंह को JDU में No Entry, मनीष वर्मा साइडलाइन, संजय झा-ललन सिंह का राज

बिहार में 20 साल तक CM रहे नीतीश कुमार के 2 सबसे करीबी सिपहसालार अब राजनीति के बियाबान में भटक रहे हैं।

बात हो रही है पूर्व IAS अधिकारी RCP सिंह और मनीष वर्मा की, जिन्हें कभी नीतीश का उत्तराधिकारी माना जाता था।

नीतीश के 2 करिश्माई गुण और 2 भरोसेमंद

नीतीश का पहला गुण - किसी को भी पटा लेना और बड़ा त्याग करवा लेना, दूसरा - मन की बात किसी को समझ न आने देना। इसी मायावी खेल में उन्होंने 2 IAS को नौकरी छुड़वाकर JDU में लाया।

RCP सिंह - उत्तराधिकारी से बेगाना

UP कैडर के IAS, नालंदा के रहने वाले, कुर्मी समाज से। रेल मंत्री रहते नीतीश के संपर्क में आए, 2010 में VRS लेकर JDU में आए। संगठन महासचिव से राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री तक बने।

लेकिन 2020 में JDU 43 सीट पर सिमटी तो ठीकरा RCP पर फूटा। 2022 में संपत्ति विवाद पर इस्तीफा मांग लिया गया। BJP में गए, भाव नहीं मिला, अपनी पार्टी बनाई, फिर जन सुराज में विलय कर दिया।

अब जून 2026 में नीतीश से मिलकर वापसी चाहते हैं, लेकिन ललन सिंह ने साफ कहा - "जिन्होंने पार्टी को कमजोर किया, उनकी जरूरत नहीं।"

मनीष वर्मा - चुप्पी में गुमनामी

2000 बैच ओडिशा कैडर, पटना-पूर्णिया के DM रहे, CM के प्रधान सचिव और सात निश्चय के हीरो। 2021 में VRS लेकर JDU के राष्ट्रीय महासचिव बने।

RCP की तरह इन्हें भी उत्तराधिकारी बताया गया। जिलों में दौरा कर रहे थे, अचानक फील्ड से वापस बुला लिया गया। राज्यसभा-MLC में नाम आया, मौका दूसरों को मिल गया।

अब संगठन में तो हैं, लेकिन बड़े फैसलों से दूर, पूरी तरह साइलेंट।

JDU में नया पावर सेंटर

अब JDU पर संजय झा और ललन सिंह की पकड़ है। संजय झा तो JDU का नाम बदलकर "जनता दल नीतीश" करने का प्रस्ताव तक ले आए, जिसे उमेश कुशवाहा और श्रवण कुमार ने सपोर्ट कर दिया।

मतलब साफ है - नीतीश अब नई पीढ़ी और निशांत कुमार के इर्द-गिर्द पार्टी बना रहे हैं, पुराने भरोसेमंदों की जरूरत खत्म।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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