PM Modi और Gen Z: NEET पेपर लीक पर छात्रों से संवाद, याद किया 1974 का गुजरात नवनिर्माण आंदोलन

NEET पेपर लीक पर देशभर में छात्र विरोध के बाद PM मोदी ने वीडियो संदेश में Gen Z से संवाद किया। उन्होंने मां हीराबेन पर अपशब्दों को माफ करने की बात कही। पीएम ने बताया कैसे 1974 के गुजरात नवनिर्माण आंदोलन में ABVP कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने राजनीति की शुरुआत की थी।

Aug 01, 2026 - 13:55
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PM Modi और Gen Z: NEET पेपर लीक पर छात्रों से संवाद, याद किया 1974 का गुजरात नवनिर्माण आंदोलन

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली से शुरू हुआ छात्र विरोध अब देशभर में फैल गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नई पीढ़ी से संवाद कर रहे हैं। अपने 5वें वीडियो संदेश में पीएम ने Gen Z को संबोधित करते हुए अपनी दिवंगत मां हीराबेन और खुद पर की गई टिप्पणियों को "माफ" करने की बात भी कही।

छात्र आंदोलन से निकले PM मोदी  
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि वह भी एक छात्र आंदोलन से निकले नेता हैं। साल 1974 में गुजरात में शुरू हुए नवनिर्माण आंदोलन में उन्होंने ABVP कार्यकर्ता के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी।

आंदोलन की शुरुआत मोरबी इंजीनियरिंग कॉलेज में मेस फीस बढ़ाने को लेकर हुई थी। जल्द ही यह भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ पूरे गुजरात का आंदोलन बन गया। उस समय मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल को इस्तीफा देना पड़ा और विधानसभा भंग करनी पड़ी।

ABVP से मिली पहचान  
उस वक्त 23-24 साल के नरेंद्र मोदी RSS के युवा प्रचारक थे। उन्हें ABVP में भेजा गया। उन्होंने युवाओं को संगठित करने, भाषण देने और आंदोलन के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने का काम किया। इसी अनुभव ने उन्हें राज्यस्तरीय राजनीति की पहली सीख दी।

नवनिर्माण का असर  
गुजरात नवनिर्माण आंदोलन ने बाद में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन को भी प्रेरित किया। राजनीतिक जानकार इसे 1975 की इमरजेंसी की पृष्ठभूमि मानते हैं। आंदोलन के बाद गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा, फिर बाबूभाई पटेल के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी।

PM मोदी ने आपातकाल के दौरान भी सक्रियता दिखाई थी। उन्होंने उस दौर पर एक कविता भी लिखी थी जिसमें जेपी आंदोलन की गूंज थी।

आज Gen Z से संवाद  
आज 50 साल बाद, NEET पेपर लीक जैसे मुद्दे पर जब Gen Z सड़कों पर है, तो पीएम मोदी उसी छात्र आंदोलन की याद के साथ उनसे संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सबसे जरूरी है।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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