NCAER रिपोर्ट के बाद बिहार में शराबबंदी पर घमासान: खत्म करें या जारी रखें? JDU-BJP आमने-सामने

NCAER ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी हटाकर आबकारी कर बहाल करने की सिफारिश की। दावा- राजस्व 14-15% बढ़ेगा। JDU बोली- समीक्षा नहीं होगी। BJP बोली- कैबिनेट फैसला लेगी। मांझी ने मांगा गुजरात मॉडल। 10 साल बाद फिर छिड़ी बहस।

Aug 12, 2026 - 17:23
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NCAER रिपोर्ट के बाद बिहार में शराबबंदी पर घमासान: खत्म करें या जारी रखें? JDU-BJP आमने-सामने

पटना: बिहार में पूर्ण शराबबंदी को 10 साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन NCAER की एक नई रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर फिर से सियासी हलचल बढ़ा दी है।

NCAER ने क्या कहा रिपोर्ट में?  
देश के प्रमुख आर्थिक शोध संस्थान NCAER ने सुझाव दिया है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित बिक्री और आबकारी कर व्यवस्था बहाल की जाए।  
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा करने से राज्य के राजस्व में 14-15% तक इजाफा हो सकता है। साथ ही रिपोर्ट में अवैध तस्करी, नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और कानून के कमजोर क्रियान्वयन का भी जिक्र है।

समीक्षा का सवाल ही नहीं
NCAER रिपोर्ट के बाद JDU ने साफ कर दिया कि शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं होगा। पार्टी ने कहा कि ये नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक सुधार का प्रतीक है। अप्रैल 2016 में महिलाओं की मांग पर ही ये कानून लागू हुआ था।

कैबिनेट लेगी फैसला
भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि शोध रिपोर्टों की समीक्षा होती रहती है। शराबबंदी का फैसला सामूहिक था और 2016 में सभी दलों ने समर्थन किया था। आगे क्या होगा ये कैबिनेट का सामूहिक निर्णय होगा। उन्होंने ये भी कहा कि जनता ने दो चुनावों में शराबबंदी को समर्थन दिया है।

NDA के अंदर ही विरोध  
HAM(S) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट के बाद उन्होंने गुजरात मॉडल लागू करने की मांग की।  
वहीं RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि शराबबंदी बिना सर्वे के लागू हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा से तस्करी रुक नहीं रही और 'खादी-खाकी' वाले ही इससे कमाई कर रहे हैं।

अब आगे क्या?  
10 साल बाद आई इस रिपोर्ट ने आर्थिक जरूरत vs सामाजिक प्रतिबद्धता की बहस फिर छेड़ दी है। एक तरफ राजस्व बढ़ाने का तर्क है, दूसरी तरफ महिला वोट बैंक और नीतीश की विरासत।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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