पेपर लीक माफिया की खैर नहीं: 10 साल जेल और 10 करोड़ जुर्माना का प्रावधान, सरकार ने पेश किया नया बिल...

केंद्र सरकार ने लोकसभा में 'The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक 2026' पेश किया है। नए कानून में संगठित पेपर लीक और नकल माफिया पर सख्त प्रहार किया गया है। अब दोषियों को 10 साल तक जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना हो सकता है। बिल में AI से नकल, साइबर हैकिंग, परीक्षा एजेंसियों की लापरवाही और फास्ट ट्रैक सुनवाई का भी प्रावधान है। छात्र विरोध के बाद लाए गए इस बिल का मकसद ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य बचाना है।

Jul 27, 2026 - 15:09
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पेपर लीक माफिया की खैर नहीं: 10 साल जेल और 10 करोड़ जुर्माना का प्रावधान, सरकार ने पेश किया नया बिल...

नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ी और पेपर लीक की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने लोकसभा में 'The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक 2026' पेश कर दिया है।

बिल लाने की वजह  
देशभर में NEET, SSC जैसी परीक्षाओं में धांधली को लेकर छात्रों के बड़े प्रदर्शन के बाद सरकार ने कानून को और मजबूत करने का फैसला किया। PM नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेंगे। साथ ही नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में NTA में तकनीकी सुधार के लिए टास्क फोर्स भी बनाई गई है।

नए बिल की 5 बड़ी बातें

1. सजा दोगुनी: अब 10 साल तक जेल  
संगठित पेपर लीक गिरोह चलाने वालों के लिए सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इन मामलों के पीछे माफिया काम करते हैं, इसलिए कड़ी सजा जरूरी है।

2. जुर्माना 10 करोड़ तक  
आर्थिक दंड भी 10 गुना बढ़ाया गया है। अब अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगेगा। अगर पेपर लीक की वजह से परीक्षा दोबारा करानी पड़ी तो उसका पूरा खर्च भी दोषियों से वसूला जाएगा।

3. AI और साइबर नकल भी अपराध  
अब सिर्फ पेपर चोरी ही नहीं। AI की मदद से नकल, परीक्षा पोर्टल हैक करना, ऑनलाइन पेपर लीक और साइबर फ्रॉड भी इस कानून के दायरे में आएंगे।

4. परीक्षा एजेंसियां भी होंगी जिम्मेदार  
अगर NTA, सर्विस प्रोवाइडर या कोई सरकारी अधिकारी लापरवाही या मिलीभगत में पकड़ा गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इससे पूरी सिस्टम की जवाबदेही तय होगी।

5. फास्ट ट्रैक जांच और सुनवाई  
बिल में जांच एजेंसियों को ज्यादा अधिकार और केंद्र-राज्य के बीच बेहतर समन्वय का प्रावधान है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की जल्दी सुनवाई होगी ताकि दोषियों को समय पर सजा मिले।

सरकार का मकसद साफ है - मेहनत से पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना और पेपर लीक माफिया का सफाया करना।

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