'सृजन घोटाला' फिर गरमाया...तेजस्वी ने 5500 करोड़ के घोटाले पर घेरा नीतीश-बीजेपी, पूछा- 9 साल में हिसाब कहां
तेजस्वी यादव ने 9 साल पुराने सृजन घोटाले को मुद्दा बनाकर नीतीश सरकार, बीजेपी और केंद्र को घेरा। कहा 5500 करोड़ की लूट का कोई हिसाब नहीं। सीबीआई की धीमी जांच पर सवाल। बांकीपुर-दतिया हार के बाद RJD की आक्रामक वापसी।
पटना: सृजन घोटाला एक बार फिर बिहार की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को उठाकर राज्य सरकार और केंद्र दोनों पर हमला बोला है।
तेजस्वी ने क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी ने X पर पोस्ट कर कहा कि आज से 9 साल पहले बिहार में 5500 करोड़ रुपये के सृजन घोटाले का खुलासा हुआ था। उनके मुताबिक सरकारी खजाने से रकम तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबियों के निजी खातों में ट्रांसफर की गई थी। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं के घोटालेबाजों से संबंध के सबूत मिले थे, लेकिन जांच एजेंसियों ने सब पर पर्दा डाल दिया। 9 साल बाद भी लूटे गए पैसे का कोई हिसाब नहीं।
क्या है सृजन घोटाला?
ये मामला भागलपुर के 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति' नामक NGO से जुड़ा है। आरोप है कि 2004 से 2014 के बीच सरकारी योजनाओं के 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा फर्जी बैंक स्टेटमेंट के जरिए इस NGO के खाते में भेज दिए गए। इसमें जिला प्रशासन, बैंक और NGO के लोग शामिल बताए गए।
जांच कहां तक पहुंची?
CBI की जांच अभी जारी है। नवंबर 2025 में पटना की विशेष अदालत ने 3 लोगों को सजा सुनाई थी। मुख्य आरोपी रजनी प्रिया गिरफ्तार हो चुकी है। लेकिन CBI की फाइनल रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
तीन निशाने एक साथ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी ने इस मुद्दे से एक साथ तीन टारगेट साधे हैं:
1. नीतीश कुमार - 'सुशासन' की छवि पर सवाल
2. बीजेपी और केंद्र सरकार - CBI की धीमी जांच के लिए जिम्मेदार ठहराया
3. सम्राट चौधरी सरकार - भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरना
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब तक CBI क्लोजर रिपोर्ट नहीं देती, ये मुद्दा जिंदा रहेगा और तेजस्वी इसी को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। बांकीपुर और दतिया उपचुनाव में हार के बाद RJD ने 'सृजन' के मुद्दे से कार्यकर्ताओं में जोश भरने और सरकार को बैकफुट पर लाने की रणनीति अपनाई है।
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