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यूपी में सरकारी नौकरी के कैरेक्टर वेरिफिकेशन नियमों में बड़ा बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन के लिए सड़क पर हिंसा या हिंसक प्रोटेस्ट में शामिल तो गवर्नमेंट जॉब नहीं मिलेगी, अपर मुख्य सचिव एम देवराज ने आदेश जारी, हिंसा के जरिए समाज बदलने वाले संगठन से जुड़े तो अयोग्य, 21 साल बाद और जांच से 3 साल के अंदर गतिविधि तो सक्रिय माना जाएगा जब तक सुधार का सबूत नहीं, राजनीतिक सोच पर अयोग्य नहीं, नियम सभी विभाग परिषद निगम स्थानीय निकाय की सीधी भर्ती पर लागू, हत्या डकैती बलात्कार पेपर लीक सॉल्वर गैंग भ्रष्टाचार आतंकी गतिविधि में दोषी भी अयोग्य, सिर्फ FIR या जांच चल रही तो योग्य माना जाएगा बरी समझौता किशोर न्याय में अयोग्य नहीं, पहले से कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा वेरिफिकेशन नहीं, आदेश जारी तिथि से लागू पुराने मामले भी इसी से निपटेंगे।

Oct 29, 2026 - 18:26
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लखनऊ। अगर आप UP में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और प्रोटेस्ट में जाते हैं, तो ये खबर आपके लिए है। योगी सरकार ने कैरेक्टर वेरिफिकेशन के नियम बदल दिए।

हिंसक प्रोटेस्ट किया तो नौकरी गई

नया नियम - व्यवस्था परिवर्तन के लिए सड़क पर हिंसा करना या हिंसक प्रोटेस्ट में शामिल होना - तो सरकारी नौकरी का रास्ता बंद।

आदेश नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. देवराज ने जारी किया है।

 कोई भी व्यक्ति ऐसे संगठन से जुड़ा है जो हिंसा के जरिए समाज में बदलाव लाना चाहता है, तो वो अयोग्य होगा।

कब से लागू?

आदेश में लिखा है -

 "21 साल की उम्र पूरी करने के बाद और जांच की तारीख से 3 साल के अंदर ऐसी गतिविधि में भाग लेना, इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति अभी भी सक्रिय है, जब तक सुधार का ठोस सबूत न मिले।"

ये आदेश जारी होने की तारीख से ही लागू होगा। पहले से चल रहे केस भी इसी नियम से निपटेंगे।

राजनीतिक सोच पर नहीं रोक

साफ किया - किसी की राजनीतिक सोच या विचारधारा के आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा। सिर्फ हिंसक गतिविधि और ऐसे संगठनों से जुड़ाव देखा जाएगा।

किन भर्तियों पर लागू?

राज्य के सभी विभाग, परिषद, निगम, स्थानीय निकाय की सीधी भर्ती पर लागू।

साथ ही - हत्या, डकैती, बलात्कार, महिला से दुर्व्यवहार, आतंकी गतिविधि, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए तो भी नौकरी नहीं।

FIR वालों के लिए राहत

अक्सर कंफ्यूजन रहता है FIR को लेकर। नया अपडेट -

- सिर्फ FIR दर्ज है या जांच चल रही है तो योग्य माना जाएगा
- बरी होने, समझौता होने, किशोर न्याय कानून के मामलों में भी अयोग्य नहीं
- केस देखकर नियमों के आधार पर फैसला होगा

और पहले से नौकरी कर रहे कर्मचारियों का दोबारा कैरेक्टर वेरिफिकेशन नहीं होगा।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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