NCAER और मांझी ने कहा हटाओ शराबबंदी, पर सम्राट सरकार बोली- 'महिला वोट' से खिलवाड़ नहीं करेंगे

NCAER ने बिहार के विकास के लिए शराबबंदी हटाने की सिफारिश की। जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल का सुझाव दिया। लेकिन सम्राट चौधरी सरकार ने साफ किया कानून नहीं हटेगा। वजह- महिला वोट बैंक और नीतीश का विरासत वाला फैसला।

Aug 11, 2026 - 16:49
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NCAER और मांझी ने कहा हटाओ शराबबंदी, पर सम्राट सरकार बोली- 'महिला वोट' से खिलवाड़ नहीं करेंगे

पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। NCAER की रिपोर्ट और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान के बाद भी सम्राट चौधरी सरकार ने साफ कर दिया है कि कानून में कोई बदलाव नहीं होगा।

क्या कहती है NCAER की रिपोर्ट?  
'इंडिया पॉलिसी फोरम-2026' में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि बिहार की आबादी 2026 तक 13.2 करोड़ हो जाएगी। विकास के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है और इसका सबसे बड़ा जरिया एक्साइज ड्यूटी है जो शराबबंदी के बाद खत्म हो गई।  
NCAER ने तर्क दिया कि शराबबंदी के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं घटे और अवैध तस्करी रोकने पर सरकारी खर्च बढ़ा है।

मांझी का 'गुजरात मॉडल' वाला सुझाव  
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी को पूरी सख्ती से लागू किया जाए या फिर गुजरात मॉडल की तर्ज पर नियंत्रित तरीके से इजाजत दी जाए।

सरकार क्यों नहीं मानेगी?  
सरकार का जवाब सीधा है - राजनीतिक जोखिम नहीं लेंगे।  
1. महिला वोट बैंक: 2025 चुनाव में 130 सीटों पर महिला वोटिंग पुरुषों से ज्यादा थी। इनमें 114 सीटें NDA ने जीतीं। 2020 में भी 92 सीटें महिलाओं के दम पर आईं।  
2. नीतीश की विरासत: 5 अप्रैल 2016 को नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू की थी। सम्राट चौधरी कई बार कह चुके हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले से छेड़छाड़ नहीं होगी।  
3. PK का उदाहरण: शराबबंदी हटाने का वादा करने वाले प्रशांत किशोर को सिर्फ 3.3% वोट मिले और 236 सीटों पर जमानत जब्त हुई।

आंकड़े क्या कहते हैं?  
NFHS डेटा के मुताबिक बिहार में पुरुषों में शराब पीने की दर 28.9% से घटकर 16.5% रह गई। घरेलू हिंसा और प्री-हाइपरटेंशन में भी पड़ोसी राज्यों के मुकाबले कमी दिखी। मंत्री सुनील कुमार ने कहा, शराबबंदी जारी रहेगी।

आर्थिक तर्क कितने भी हों, बिहार की सियासत में शराबबंदी अब 'महिला सम्मान' का मुद्दा बन चुकी है। इसलिए 2026 में भी इसके हटने के आसार बेहद कम हैं।

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Kajal Tiwari

लेखक के बारे में, काजल तिवारी एक समर्पित पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2019 से अपने करियर की शुरुआत की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले लगभग 6–7 वर्षों के अपने पत्रकारिता अनुभव में मुझे पटना के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इस दौरान मैंने पत्रकारिता के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम किया, जिसमें न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की कवरेज, इंटरव्यू, कंटेंट राइटिंग और वॉयसओवर शामिल हैं। पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों तक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पहुँचाने का माध्यम है। मेरा प्रयास हमेशा तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा है।

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